कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया। मंच से वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब सच्ची पत्रकारिता पर दबाव, भय और लालच के बादल मंडरा रहे हैं, तब ऐसे आयोजन पत्रकारों को नई ऊर्जा और दिशा देते हैं। वक्ताओं ने साफ कहा कि पत्रकारों को किसी भी परिस्थिति में सच के साथ खड़ा रहना चाहिए, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।
कार्यशैली सत्र में वरिष्ठ पत्रकारों ने युवा पत्रकारों को खबरों की सत्यता, निष्पक्षता और जनहित को प्राथमिकता देने का मंत्र दिया। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का मिशन है। जब पत्रकार एकजुट होते हैं, तब सत्ता और व्यवस्था को भी जनता की आवाज सुननी पड़ती है।
इसी कड़ी में आयोजित कवि सम्मेलन ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, व्यंग्यात्मक और राष्ट्रप्रेरक रचनाओं से माहौल को जोश से भर दिया। मंच से निकली हर पंक्ति मानो पत्रकारों के हौसले को और मजबूत कर रही थी। तालियों की गड़गड़ाहट और “वाह-वाह” की गूंज से पूरा पंडाल गूंज उठा।
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रही पत्रकारों की अभूतपूर्व एकता। अलग-अलग जिलों और संस्थानों से आए पत्रकारों ने यह संदेश दिया कि भले ही उनकी कलम अलग-अलग हो, लेकिन सच, न्याय और जनहित के लिए उनका संघर्ष एक है। सभी ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारों पर आने वाली चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों में हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
सारंगढ़ का यह आयोजन प्रदेश भर के पत्रकारों के लिए प्रेरणा बन गया है।



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