![]() |
| उप निरीक्षक गिरधारी साव ने प्रकरण की विवेचना की थी। मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई। |
अभियोजन के अनुसार, 23 अक्टूबर 2020 को पीड़िता ने थाना पूंजीपथरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 अक्टूबर 2020 को वह अपने मंगेतर के साथ मोटरसाइकिल से बंजारी मंदिर, तराईमाल दर्शन के लिए गई थी। मंदिर से लौटते समय गोदगोदा नाला घाट के समीप आरोपियों द्वारा पीड़िता एवं उसके मंगेतर के साथ गाली-गलौज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने उनके पास से नगदी एवं मोबाइल ले लिए तथा पीड़िता और उसके मंगेतर के फोटो एवं वीडियो तैयार किए। साथ ही उन्हें वायरल करने की धमकी देकर राशि की मांग की गई।
पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना पूंजीपथरा में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान उप निरीक्षक गिरधारी साव द्वारा पीड़िता सहित अन्य गवाहों के कथन दर्ज किए गए तथा तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन जप्त किए गए। जप्त मोबाइल फोन का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, जिसमें आरोपियों द्वारा वीडियो बनाए जाने से संबंधित साक्ष्य प्राप्त हुए।
विचारण के दौरान न्यायालय में पीड़िता, उसके मंगेतर सहित कुल 9 साक्षियों के बयान दर्ज कराए गए तथा 16 दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने साक्ष्यों एवं गवाहों के कथनों के आधार पर पाया कि आरोपियों द्वारा पीड़िता के फोटो एवं वीडियो तैयार कर उन्हें वायरल करने की धमकी दी गई तथा महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई।
न्यायालय ने तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 354-क, 354-ग एवं 509-क के तहत दोषसिद्ध पाया तथा धारा 354-क एवं 354-ग के अंतर्गत 3-3 वर्ष तथा धारा 509-क के अंतर्गत 1-1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। हालांकि, अभियोजन पक्ष लूटपाट से संबंधित धाराओं को सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका।
एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के विरुद्ध अपराध करने वालों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस प्रभावी विवेचना के माध्यम से न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
